दिनांकः 30.01.2018
स्थानः सेठ एम.आर.जयपुरिया स्कूल
नगर के प्रतिष्ठित सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल में आज सन्त रविदास के जीवन एवं साहित्य के विषय में विद्यार्थियों को बताया गया। विद्यार्थियों ने प्रार्थना सभा में बहुत ध्यान से, शान्तचित होकर सन्त रविदास के विषय में सुना और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। प्रधानाध्यापिका प्राॅमिनी चोपड़ा ने सभी को रविदास जयन्ती की शुभ कामना देते हुए बच्चों से पूछा कि सन्त रविदास के जीवन की किस घटना ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया और क्यों ? बच्चों ने बताया कि ‘कर्म ही पूजा है’ इस सन्देश से वे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बच्चों को सन्त रविदास के जीवन से जुड़ी यह घटना प्रेरक लगी कि एक बार सन्त रविदास गंगा स्नान के लिये नहीं गये क्योंकि उन्होंने एक व्यक्ति को जूता बना कर देने का वचन दिया था। सन्त रविदास का कहना था गंगा स्नान के लिये जाने पर भी उनका ध्यान अपने काम पर लगा रहेगा। जहाँ तक गंगा स्नान की बात है, मन शुद्ध हो तो कठौती के जल में ही गंगा स्नान का पुण्य मिल जायेगा। कहते हैं तभी से यह कहावत प्रचलित हो गई-‘मन चंगा तो कठौती में गंगा।’अध्यापिका किरण सिंह ने सन्त रैदास के जीवन और कर्म पर प्रकाश डालते हुये कहा कि सन्त रैदास को कृष्ण भक्त कवयित्री मीरा अपना गुरु मानती थीं। उन्होंने रैदास के उस दोहे का पाठ किया जिसमें उन्होंने यह बताया है कि राम, कृष्ण, करीम, राघव, हरि, अल्लाह एक ही ईश्वर के विविध नाम हैं। श्रेष्ठ सोनकर और काम्या राय ने संत रैदास द्वारा लिखी कविताओं का पाठ करते हुए उनकी व्याख्या भी प्रस्तुत की। समूह गान में विद्यार्थियों ने सन्त रैदास का लिखा भजन, ‘प्रभुजी! तुम चन्दन हम पानी!’ को मधुर स्वर में गाया। कक्षाओं में अध्यापक-अध्यापिकाओं ने सन्त रैदास के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में छात्रों को बताया। हरिशंकर सिंह, प्रज्ञा पाठक, निधि सक्सेना, अनीता सिंह, दीप्ति अवस्थी,नेहा सिंह आदि ने बताया कि बच्चे मन्त्रमुग्ध हो कर सन्त रैदास के विषय में सुन रहे थे और इस तरह से उस समय और समाज को प्रासंगिक बना रहे थे।